ऋषि ज्ञान
ऋषि ज्ञान रुषति - गच्छति संसारपारम् इति। यह ऋषि कि व्यख्या हे . ऋषि कि आंखो के सामने सन्सार के पारलौकिक कल्याण का स्पष्ट दर्शन होता है.इंसान का सच्चा आप्तजन ऋषि ही हे . क्यूंकि वह राग द्वेष को वश हो कर कुछ भी अन्यथा नहीं बोलता और किसीको गलत सलाह नहीं देता

भगवान श्री राम परमेश्वर स्वरुप हे - श्रीरामचरितमानस

भगवान श्री राम परमेश्वर स्वरुप हे - श्रीरामचरितमानस
एक अनीह अरूप अनामा | अज सच्चिदानंद पर धामा ||
ब्यापक बिस्वरूप भगवाना
तेहिं धरि देह चरित कृत नाना ||

जो परमेश्वर एक हैं, जिनके कोई इच्छा नहीं है, जिनका कोई रूप और नाम नहीं है, जो अजन्मा, सच्चिदानन्द और परमधाम हैं और जो सबमें व्यापक एवं विश्वरूप हैं, उन्हीं भगवान्ने दिव्य शरीर धारण करके नाना प्रकारकी लीला की है ||

श्रीरामचरितमानस

comments powered by Disqus