ऋषि ज्ञान
ऋषि ज्ञान रुषति - गच्छति संसारपारम् इति। यह ऋषि कि व्यख्या हे . ऋषि कि आंखो के सामने सन्सार के पारलौकिक कल्याण का स्पष्ट दर्शन होता है.इंसान का सच्चा आप्तजन ऋषि ही हे . क्यूंकि वह राग द्वेष को वश हो कर कुछ भी अन्यथा नहीं बोलता और किसीको गलत सलाह नहीं देता

भगवान श्री राम का वर्णन शब्दों में करना बहुत कठिन हे - श्रीरामचरितमानस

भगवान श्री राम का वर्णन शब्दों में करना बहुत कठिन हे - श्रीरामचरितमानस

करन चहउँ रघुपति गुन गाहा | लघु मति मोरि चरित अवगाहा ||
सूझ न एकउ अंग उपाऊ | मन मति रंक मनोरथ राऊ ||

मैं श्रीरघुनाथजीके गुणोंका वर्णन करना चाहता हूँ , परंतु मेरी बुद्धि छोटी है और श्रीरामजीका चरित्र अथाह है | इसके लिये मुझे कुछ (लेशमात्र) भी उपाय नहीं सूझता | मेरे मन और बुद्धि कंगाल हैं, किंतु मनोरथ राजा है ||

श्रीरामचरितमानस

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