ऋषि ज्ञान
ऋषि ज्ञान रुषति - गच्छति संसारपारम् इति। यह ऋषि कि व्यख्या हे . ऋषि कि आंखो के सामने सन्सार के पारलौकिक कल्याण का स्पष्ट दर्शन होता है.इंसान का सच्चा आप्तजन ऋषि ही हे . क्यूंकि वह राग द्वेष को वश हो कर कुछ भी अन्यथा नहीं बोलता और किसीको गलत सलाह नहीं देता

संगत का असर - श्रीरामचरितमानस

संगत का असर - श्रीरामचरितमानस

धूम कुसंगति कारिख होईः | लिखिअ पुरान मंजु मसि सोई ||
सोइ जल अनल अनिल संघाता | होइ जलद जग जीवन दाता ||

कुसंगके कारण धुआँ कालिख कहलाता है , वही धुआँ [ सुसंगसे ] सुन्दर स्याही होकर पुराण लिखनेके काम आता है और वही धुआँ जल , अग्नि और पवनके संगसे बादल होकर जगत्को जीवन देनेवाला बन जाता है ||

श्रीरामचरितमानस

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