ऋषि ज्ञान
ऋषि ज्ञान रुषति - गच्छति संसारपारम् इति। यह ऋषि कि व्यख्या हे . ऋषि कि आंखो के सामने सन्सार के पारलौकिक कल्याण का स्पष्ट दर्शन होता है.इंसान का सच्चा आप्तजन ऋषि ही हे . क्यूंकि वह राग द्वेष को वश हो कर कुछ भी अन्यथा नहीं बोलता और किसीको गलत सलाह नहीं देता

गिरनार

गिरनार
गिरनार के बारे में मेरा अनुभव अगर बता दिया तो आप लोग मानेंगे नहीं और तर्क करेंगे | कुछ बातें लिखने बोलने के लिए नहीं होती अनुभव योग्य होती हे | फिर भी आपको संक्षेप में बताऊ तो गिरनार का अंदर का भाग रिक्त हे | हर जगह सिद्धो संतो की गुफाए हे | हर गुफा में जल आदि की सम्पूर्ण सुविधा हे हर जगह स्वयं प्रकाशित देवी देवताओ की मूर्ति बिराजमान हे ||

प. पू .पुनीताचारिजी महाराज , गिरनार

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