ऋषि ज्ञान
ऋषि ज्ञान रुषति - गच्छति संसारपारम् इति। यह ऋषि कि व्यख्या हे . ऋषि कि आंखो के सामने सन्सार के पारलौकिक कल्याण का स्पष्ट दर्शन होता है.इंसान का सच्चा आप्तजन ऋषि ही हे . क्यूंकि वह राग द्वेष को वश हो कर कुछ भी अन्यथा नहीं बोलता और किसीको गलत सलाह नहीं देता

अवधूत - गुरु गोरखनाथ

अवधूत - गुरु गोरखनाथ

एक हाथ में त्याग हे , दूसरे में भोग |
त्याग भोग से लिप्त ना , सो अवधूती जोग ||

अवधूत कोई भी भोग भोगे फिरभी वह पाप या पुण्य से लिप्त नहीं होता ||

गुरु गोरखनाथ

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