ऋषि ज्ञान
ऋषि ज्ञान रुषति - गच्छति संसारपारम् इति। यह ऋषि कि व्यख्या हे . ऋषि कि आंखो के सामने सन्सार के पारलौकिक कल्याण का स्पष्ट दर्शन होता है.इंसान का सच्चा आप्तजन ऋषि ही हे . क्यूंकि वह राग द्वेष को वश हो कर कुछ भी अन्यथा नहीं बोलता और किसीको गलत सलाह नहीं देता

श्री नारदपुराण - दत्तात्रेय स्तोत्र

श्री नारदपुराण - दत्तात्रेय स्तोत्र

भिक्षाटनं गृहे ग्रामे पात्रं हेममयं करें |
नानास्वादमयी भिक्षा दत्तात्रेय नमोऽस्तु ते||

हाथ में सुवर्ण पात्र लिए वे घर घर और गांव गांव भिक्षा के लिए जाते है और जो विविध दिव्य स्वाद युक्त भिक्षा ग्रहण करते है ऐसे हे दत्तात्रेय! आपको नमस्कार !||

-श्री नारदपुराण - दत्तात्रेय स्तोत्र श्लोक 10

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