ऋषि ज्ञान
ऋषि ज्ञान रुषति - गच्छति संसारपारम् इति। यह ऋषि कि व्यख्या हे . ऋषि कि आंखो के सामने सन्सार के पारलौकिक कल्याण का स्पष्ट दर्शन होता है.इंसान का सच्चा आप्तजन ऋषि ही हे . क्यूंकि वह राग द्वेष को वश हो कर कुछ भी अन्यथा नहीं बोलता और किसीको गलत सलाह नहीं देता

मूर्ति पूजा रहस्य

मूर्ति पूजा रहस्य

न देवो विद्यते काष्ठे न पाषाणे मृत्स्वपि | भावे ही विद्यते देवो तस्माद भावोहि कारणम ||

भगवान पत्थर , माटी या लकड़ी में नहीं हे , लेकिन आपके भाव से उसमे प्रगट होते हे | भगवान सर्वत्र हे | और भक्ति भाव प्रधान हे | भाव के बिना कोई सिद्धि नहीं होती |

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