ऋषि ज्ञान
ऋषि ज्ञान रुषति - गच्छति संसारपारम् इति। यह ऋषि कि व्यख्या हे . ऋषि कि आंखो के सामने सन्सार के पारलौकिक कल्याण का स्पष्ट दर्शन होता है.इंसान का सच्चा आप्तजन ऋषि ही हे . क्यूंकि वह राग द्वेष को वश हो कर कुछ भी अन्यथा नहीं बोलता और किसीको गलत सलाह नहीं देता

यज्ञ में श्रीफल की आहुति क्यों दी जाती हे ?

यज्ञ में श्रीफल की आहुति क्यों दी जाती हे ?

श्रीफल को इंसान के मस्तिष्क का प्रतिक माना जाता हे | मस्तिष्क में भरे हुए अहंकार को यज्ञ के ज्ञान अग्नि में होम दिया जाता हे और खुद अहंकार रहित हो जाते हे ऐसा भाव इसमें रहता हे |

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