ऋषि ज्ञान
ऋषि ज्ञान रुषति - गच्छति संसारपारम् इति। यह ऋषि कि व्यख्या हे . ऋषि कि आंखो के सामने सन्सार के पारलौकिक कल्याण का स्पष्ट दर्शन होता है.इंसान का सच्चा आप्तजन ऋषि ही हे . क्यूंकि वह राग द्वेष को वश हो कर कुछ भी अन्यथा नहीं बोलता और किसीको गलत सलाह नहीं देता

सदगुरु किसे कहते हे ?

सदगुरु किसे कहते हे ?

सर्व सन्देहसन्दोहनिर्मूलनविचक्षण: |
जन्म मृत्यु भयघ्नो य: स गुरु: परमोमत: ||

हर प्रकार के सन्देह को जड़ से नष्ट कर ,जो जन्म और मृत्यु के भय का नाश करे वह “परमगुरु” हे , वही सद्गुरु हे

- स्कन्दपुराण (शिव पार्वती संवाद)

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