ऋषि ज्ञान
ऋषि ज्ञान रुषति - गच्छति संसारपारम् इति। यह ऋषि कि व्यख्या हे . ऋषि कि आंखो के सामने सन्सार के पारलौकिक कल्याण का स्पष्ट दर्शन होता है.इंसान का सच्चा आप्तजन ऋषि ही हे . क्यूंकि वह राग द्वेष को वश हो कर कुछ भी अन्यथा नहीं बोलता और किसीको गलत सलाह नहीं देता

धर्म क्या हे ?

धर्म क्या हे ?

धर्म का मतलब हे इंसान के भीतर के ईश्वर को प्रकट करना

Religion is the manifestation of divinity already in man

**स्वामी विवेकानंद **

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