ऋषि ज्ञान
ऋषि ज्ञान रुषति - गच्छति संसारपारम् इति। यह ऋषि कि व्यख्या हे . ऋषि कि आंखो के सामने सन्सार के पारलौकिक कल्याण का स्पष्ट दर्शन होता है.इंसान का सच्चा आप्तजन ऋषि ही हे . क्यूंकि वह राग द्वेष को वश हो कर कुछ भी अन्यथा नहीं बोलता और किसीको गलत सलाह नहीं देता

छत्रपति शिवाजी महाराज

छत्रपति शिवाजी महाराज

सुर्य नारायण जर उगवले नसते तर..
आकाशाचा रंगचं समजला नसता..
जर छञपती शिवाजी राजे जन्मले नसते तर..
खरचं हिंदु धर्माचा अर्थच समजला नसता..
हे हिंदु प्रभो शिवाजी राजा

जैसे भगवान सूर्य नारायण आकाश में न उगते तो आकाश का रंग ही समज में न आता , वैसे ही अगर छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म न हुआ होता तो हिन्दू धर्म का अर्थ भी समज में न आया होता

हिन्दू सम्राट छत्रपति शिवाजी महाराज की जय

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