ऋषि ज्ञान
ऋषि ज्ञान रुषति - गच्छति संसारपारम् इति। यह ऋषि कि व्यख्या हे . ऋषि कि आंखो के सामने सन्सार के पारलौकिक कल्याण का स्पष्ट दर्शन होता है.इंसान का सच्चा आप्तजन ऋषि ही हे . क्यूंकि वह राग द्वेष को वश हो कर कुछ भी अन्यथा नहीं बोलता और किसीको गलत सलाह नहीं देता

दलित संत रविदास

दलित संत रविदास

वेद धर्म सबसे बड़ा अनुपम सच्चा ज्ञान, फिर मै क्यों छोडू इसे पढ़ लू झूठ कुरान |
वेद धर्म छोडू नहीं कोसिस करो हज़ार, तिल-तिल काटो चाहि, गोदो अंग कटार ||

दलित संत रविदास जो महान हिंदू चमार समुदाय में पैदा हुए थे , उनको सिकंदर लोधी ने इस्लाम धर्म स्वीकार करने के लिए कहा था, तो उन्होंने यह कविता कही थी |

वेद धर्म ही अकल्पनीय सत्य हैं, वेद धर्म को नहीं छोडूंगा , भले ही हजारों प्रयत्न करोगे | मुझे काट डालोगे , मेरे शरीर को छुरे से वेध दोगे , फिर भी वेद धर्म को नहीं छोडूंगा । ||

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