ऋषि ज्ञान
ऋषि ज्ञान रुषति - गच्छति संसारपारम् इति। यह ऋषि कि व्यख्या हे . ऋषि कि आंखो के सामने सन्सार के पारलौकिक कल्याण का स्पष्ट दर्शन होता है.इंसान का सच्चा आप्तजन ऋषि ही हे . क्यूंकि वह राग द्वेष को वश हो कर कुछ भी अन्यथा नहीं बोलता और किसीको गलत सलाह नहीं देता

सच्चा जीवन - स्वामी विवेकानंद

सच्चा जीवन - स्वामी विवेकानंद

जब आप विचार,बुद्धि और तर्क को पीछे छोड़ आगे बढ़ते हो तभी आप ईश्वर की और पहला कदम बढ़ाते हो और तभी आपका जीवन शुरू होता हे | जिसको आप जीवन समझते हो वह तो सच्चे जीवन की गर्भ अवस्था मात्र हे ||

स्वामी विवेकानंद

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