ऋषि ज्ञान
ऋषि ज्ञान रुषति - गच्छति संसारपारम् इति। यह ऋषि कि व्यख्या हे . ऋषि कि आंखो के सामने सन्सार के पारलौकिक कल्याण का स्पष्ट दर्शन होता है.इंसान का सच्चा आप्तजन ऋषि ही हे . क्यूंकि वह राग द्वेष को वश हो कर कुछ भी अन्यथा नहीं बोलता और किसीको गलत सलाह नहीं देता

मोक्ष के योग्य कौन हे?

मोक्ष के योग्य कौन हे?

यं हि न व्यथयन्त्यते पुरुषं पुरुषर्षभ |
समदुःखसुखं धीरं सोऽमृतत्वाय कल्पते ||

हे पुरुषश्रेष्ठ | सुख-दुःख को समान समजनेवाले जिस धीर पुरुषको ये इन्द्रिय और विषयो के संयोग व्याकुल नहीं करते , वह मोक्ष के योग्य हे ||

-श्रीमदभगवदगीता

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