ऋषि ज्ञान
ऋषि ज्ञान रुषति - गच्छति संसारपारम् इति। यह ऋषि कि व्यख्या हे . ऋषि कि आंखो के सामने सन्सार के पारलौकिक कल्याण का स्पष्ट दर्शन होता है.इंसान का सच्चा आप्तजन ऋषि ही हे . क्यूंकि वह राग द्वेष को वश हो कर कुछ भी अन्यथा नहीं बोलता और किसीको गलत सलाह नहीं देता

ईश्वर विश्वास

ईश्वर विश्वास

ईश्वर विश्वास का अर्थ यह नहीं की आप आलस्य और मलिनता में पड़ कर सब ईश्वर पर छोड़ दे . वेद ऐसी शिक्षा नहीं देते . वेद कहते हे की “ भवसागर पार करने तुम ईश्वर का पल्ला पकड़ो, लेकिन पल्ला पकड़ने की ताकत स्वयं तुम्हे पैदा करनी हे

-महर्षि दयानन्द

comments powered by Disqus