ऋषि ज्ञान
ऋषि ज्ञान रुषति - गच्छति संसारपारम् इति। यह ऋषि कि व्यख्या हे . ऋषि कि आंखो के सामने सन्सार के पारलौकिक कल्याण का स्पष्ट दर्शन होता है.इंसान का सच्चा आप्तजन ऋषि ही हे . क्यूंकि वह राग द्वेष को वश हो कर कुछ भी अन्यथा नहीं बोलता और किसीको गलत सलाह नहीं देता

प.पु. पुनीताचरिजी महाराज

प.पु. पुनीताचरिजी महाराज

धन शुद्धि हो दान से ,मन शुद्धि हरी नाम |

तन शुद्धि शुभ कर्म से ,त्याग शांति का धाम ||

हरी ज्योति हिय में जले ,जीभ रटे श्री राम |

पुनीत कर्म करते रहो , सहज बनेगा काम ||

-प.पु. पुनीताचरिजी महाराज , गिरनार

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