ऋषि ज्ञान
ऋषि ज्ञान रुषति - गच्छति संसारपारम् इति। यह ऋषि कि व्यख्या हे . ऋषि कि आंखो के सामने सन्सार के पारलौकिक कल्याण का स्पष्ट दर्शन होता है.इंसान का सच्चा आप्तजन ऋषि ही हे . क्यूंकि वह राग द्वेष को वश हो कर कुछ भी अन्यथा नहीं बोलता और किसीको गलत सलाह नहीं देता

स्वामी विवेकानंद

स्वामी विवेकानंद

वेद का अर्थ हे भिन्न भिन्न कालो में भिन्न भिन्न व्यक्तियों द्वारा आविष्कृत आध्यात्मिक तत्वों का संचित कोष | इसीलिए वेदों को अनादि और अनंत कहा गया हे |

-स्वामी विवेकानंद

comments powered by Disqus