ऋषि ज्ञान
ऋषि ज्ञान रुषति - गच्छति संसारपारम् इति। यह ऋषि कि व्यख्या हे . ऋषि कि आंखो के सामने सन्सार के पारलौकिक कल्याण का स्पष्ट दर्शन होता है.इंसान का सच्चा आप्तजन ऋषि ही हे . क्यूंकि वह राग द्वेष को वश हो कर कुछ भी अन्यथा नहीं बोलता और किसीको गलत सलाह नहीं देता

हरी ॐ तत्सत जय गुरु दत्त

हरी ॐ तत्सत जय गुरु दत्त

आज के दिन १५/११/१९७५ को गिरनार में सिद्ध योगी महर्षि पुनिताचारी महाराज को सालो तक की गई रोज की १५-१८ घंटो की कठोर साधना के बाद दत्तात्रेय महाराज ने वरदान के रूप में “हरी ॐ तत्सत जय गुरु दत्त” महामंत्र दिया जिसका हेतु मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति हे

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