ऋषि ज्ञान
ऋषि ज्ञान रुषति - गच्छति संसारपारम् इति। यह ऋषि कि व्यख्या हे . ऋषि कि आंखो के सामने सन्सार के पारलौकिक कल्याण का स्पष्ट दर्शन होता है.इंसान का सच्चा आप्तजन ऋषि ही हे . क्यूंकि वह राग द्वेष को वश हो कर कुछ भी अन्यथा नहीं बोलता और किसीको गलत सलाह नहीं देता

गुरु महिमा

गुरु महिमा

गुरु महिमा अपरम्पार हे .”गुरु” शब्द की तुलना “गुरु” के साथ हो सकती हे , फिर भी समर्पण और प्रेम यह दो शब्दरूपी पुण्य को गुरु पादुका को अर्पण करने वाले को सतशिष्य कहा जा सकता हे बाकि सब को शिष्य .

विश्व की सबसे महंगी जमीन गुरुमहिमा से जुडी हुई हे . विश्व रिकॉर्ड के मुताबिक पंजाब राज्य के फतेहगढ़ साहब-गुरुद्वारा इ सरहिंद की सिर्फ चार स्क्वायर फ़ीट जमीन शेठ दिवान टोडर मल ने ७८,००० सुवर्ण मुद्रा दे कर खरीदी थी . सोने की किम्मत के हिसाब से यह ४ स्क्वायर फ़ीट की जमीन अभी के २५०००००००० रुपीये (२ अबज ५० करोड़) होती हे .

बहोत ही कीमती यह जमीन पे श्री गुरु गोविंदसिंह के दो बेटों के अंतिम संस्कार हुए थे . “चमकौर युद्ध” आज भी इतिहास इ पन्नो में चमक रहा हे , जिसमे गुरु गोविंदसिंह ने तैयार किये हुए सिर्फ ४२ शूरवीरो ने मुग़ल योद्धा वजीरखान के नेतृत्व में आए हुए ४ लाख सैनिको को मार डाला था और ६ दिसंबर १७०४ को मुग़ल साम्राज्य का अंत हुआ . गुरुकृपा से सतशिष्य जैसे ४२ शूरवीर सभी सलामत रहते हे . औरंगज़ेब ने गुरु गोविंदसिंह को “महान” कह कर प्रश्न पूछा की “आपने ऐसी अद्भुत सेना तैयार की थी , और मेरे १० लाख सैनिक मर गए ?” तब गुरु गोविंदसिंह बोले :

चिडियो से में बाज लडाऊ , गीदड़ो को में शेर बनाऊ  
सवा लाख से १ लडाऊ , तब गोविंदसिंह नाम कहउ  

गुरु-शिष्य सम्बन्ध अभिन्न तो हे ही साथ ही साथ अद्भुत भी हे . शेठ दीवान टोडरमल बहोत ही सुखी संपन्न शिख थे . वह इतिहास थे वाकिफ नहीं थे , लेकिन जब पता चला की गुरु गोविंदसिंह के दोनों बेटे शहीद हुए हे तब उनकी याद में उन्होंने वह जमीन खरीद ली . दाता को जब बिनती की गई की आपकी कोई इच्छा हे ? तब वह बोले की : मेरा कोई बेटा ना हो , जिससे मेरे परिवार मे से कोई ऐसा ना कहे की यह जमीन मेरे बाप-दादा की हे और इसी लिए मेरी हे . गुरु कृपा से हुआ भी ठीक ऐसा ही . उनको कोई संतान ना था फिर भी आज हम इन् सद्गुरु-सतशिष्य को याद कर रहे हे और आगे भी करते रहेंगे. वाहे गुरु.

हम जब हमारे गुरु आश्रम में ५०-१०० रुपये दान करते हे तो ना जाने कितनो के आगे बड़ाई करते हे खुद की वह याद रखे …

यह लेख सत्संग सुवास से लिया गया हे .

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