ऋषि ज्ञान
ऋषि ज्ञान रुषति - गच्छति संसारपारम् इति। यह ऋषि कि व्यख्या हे . ऋषि कि आंखो के सामने सन्सार के पारलौकिक कल्याण का स्पष्ट दर्शन होता है.इंसान का सच्चा आप्तजन ऋषि ही हे . क्यूंकि वह राग द्वेष को वश हो कर कुछ भी अन्यथा नहीं बोलता और किसीको गलत सलाह नहीं देता

सहज ध्यान योग

सहज ध्यान योग

गिरनार साधना आश्रम (पुनित आश्रम) के संस्थापक परमपूज्य श्री पुनिताचारीजी महाराज को कठोर तप एवं साधना के फल स्वरुप दिनांक १५-११-१९७५ संवत २०३२ के कारतक सुद-११ देव दिवाली के दिन सद्गुरु दत्तात्रेय भगवान ने दर्शन दिये और दिक्षा देकर अनुग्रहित किया। सद्गुरु दत्तात्रेय महाराजने वरदान माँगने का अनुग्रह किया, तो पूज्यश्री ने कहा कि आप मिल गये हैं, तो सब कुछ मिल गया फिर भी कृपा प्रसाद देना है तो कलिकाल के त्रिविध ताप से पिडीत मानवमात्र के लिए कुछ सहज और सरल वस्तु दिजीए, जिससे उसको शांति और संतोष मिले। पूज्यश्री की विश्वकल्याण की भावना से प्रसन्न होकर सद्गुरु दत्त भगवानने ‘हरिॐ तत्सत् जय गुरुदत्त’ मंत्र दिया और ये मंत्र मानव मात्र तक पहुंचाने को आदेश दिया और बोले कि ‘यह मंत्र ब्रह्मस्वरुप है, इससे विश्व का कल्याण होगा। इस मंत्र के जप से ध्यान, धारणा, समाधि, समस्त योगों की सहज सिध्धि और हर तरह की आध्यात्मिक उन्नति होती है। यह मंत्र प्राप्त करने के बाद पूज्यश्री विश्वभर के मानवमात्र को दैहिक, दैविक, भौतिक तापो से मुक्त होकर शांति प्राप्त करने का मार्ग बता रहे है।

सद्गुरु दत्त महाराज के आदेश से ही पूज्यश्री ऋषि परंपरा का पालन करते हुए परम पूज्य मैयाश्री शैलजादेवीजी के साथ गिरनार साधना आश्रम (भवनाथ तलेटी, जूनागढ़) में विश्व कल्याण का महान कार्य कर रहे है।

सहज ध्यान योगः

मानवमात्र के लिये दुर्लभ सहजयोग को सुलभ बनाने की कृपा, भगवान दत्तात्रेय ने वरदानी मंत्र ‘हरिॐ तत्सत् जय गुरुदत्त द्वारा की है। सहजयोग की इस पद्धति में ध्यान करने का नहीं है, होने देने का है। अपना धर्म संप्रदाय, मंत्र और गुरु को छोड़ने का नहीं है, अपनी साधनाविधि में ‘हरिॐ तत्सत् जय गुरुदत्त को जोड़ने का है।

प्रथम ‘ॐ गं गणपतये नमः ‘मन्त्र की एक माला का जप करना चाहिये । इस के बाद हरिॐ तत्सत् जय गुरुदत्त मंत्र की धुन जल्दी जल्दी से पांच दश मिनिट बोल करके ध्यान में बेठना चाहिये। ‘हरिॐ तत्सत् जयगुरूदत्त’ मंत्र बोलने से तथा ध्यान में बैठने से मनुष्य के अंदर विशेष योगिक क्रियायें होती है, यह यौगिक क्रिया इतनी सरल रूप से होती है कि मनुष्य को पता ही नहीं चलता कि ध्यान में बैठकर उनके शरीर में कब शक्तिपात हो जाता है, इस मंत्र को करने के बाद ध्यान में बैठकर जो यौगिक क्रिया होती है वह काफी उच्च कोटी की होती है, समाधि अवस्था में मनुष्य कब चला जाता है तथा कब उसे सिध्धि प्राप्त हो जाती है, उसका खुद को पता नही चलता, यह सब इस वरदानी मंत्र के द्वारा काफी सरलता से हो जाता है तथा मनुष्य धीरे धीरे आध्यात्मिक उन्नति की तरफ बढ़ने लगता है।

जब ध्यान में बैठते है तो कुछ विशेष क्रियाये होती है, जैसे कि सिर में और आँखो में भारीपन या शरीर का वजनदार होना या हलकापन महसूस होना, शरीर में कम्पन होना, जल्दी जल्दी साँसों का आना, कमर का गोल गोल हिलना, गरदन का गोल गोल धूमना, कभी हँसना कभी रोना तथा आँखो में रंगो का दिखाई देना। अपने इष्ट देवो का दिखाई देना, तिर्थ स्थानों का दिखाई देना तथा शरीर का तापमान बढ जाना अगर जैसा कुछ भी होता है तो मनुष्य को धबराना नहीं चाहिये, बल्कि समझना चाहिये कि गुरुदेव का आशिर्वाद आपके साथ है और वह सूक्ष्म रूप से आपके साथ है।

सहज ध्यान योग के लाभ:

१. रोज ध्यान करने से मनुष्य तनाव की स्थिति से मुक्त होता है तथा रोगो का सामना करने की शक्ति मिलती है।

२. अन्दर से प्रेरणा मिलती है, जिसके द्वारा यौगिक क्रिया तथा अष्टाँग योग में आगे बढके आत्म साक्षात्कार की प्राप्ति होती है।

३. पच्चीस-त्रीस साल जो मनुष्य तप-जप करते है, उसके बाद जो उनको प्राप्त होता है, वह सारी चीजें मात्र एक धण्टे के भीतर इस वरदानी मंत्र को करने से प्राप्त होती है तथा ध्यान में बैठने से काफी अनुभूतियाँ होती है।

४. इस मंत्र को करने से आपकी सभी मनोकामना पूर्ण होती है तथा घर में होनेवाले क्लेशो से मुक्ति मिलती है तथा बूरी शक्तियों का नाश होता है। . इस मंत्र के करने से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति सद्गुरू कराते है। सभी बन्धनों से मुक्त कराते हुये मोक्ष की प्राप्ति कराते हैं।

पूज्य पुनीत महाराज गुजरात के गिरनार क्षेत्र में अभी भी बिराजमान हे. उन्होंने ५० साल की कठिन तपस्या के बाद दत्तात्रेय भगवन से “हरी ॐ तत्सत जय गुरु दत्त” यह मंत्र वरदान के रूप में प्राप्त किया हे.

comments powered by Disqus