ऋषि ज्ञान
ऋषि ज्ञान रुषति - गच्छति संसारपारम् इति। यह ऋषि कि व्यख्या हे . ऋषि कि आंखो के सामने सन्सार के पारलौकिक कल्याण का स्पष्ट दर्शन होता है.इंसान का सच्चा आप्तजन ऋषि ही हे . क्यूंकि वह राग द्वेष को वश हो कर कुछ भी अन्यथा नहीं बोलता और किसीको गलत सलाह नहीं देता

हरि ॐ तत्सत् जय गुरुदत्त - महामंत्र महिमा

हरि ॐ तत्सत् जय गुरुदत्त - महामंत्र महिमा

सिद्ध भूमि गिरनार में स्थित “प. पू . पुनीत बापुश्री” को परब्रह्म परमात्मा सद्गुरु दत्तात्रेय भगवान ने विष्व कल्याण के लिए महामंत्र “हरि ॐ तत्सत् जय गुरुदत्त” देव प्रबोधिनी एकादशी २०३२ १५/११/१९७५ को वरदान रूप में दिया हे।

-चौदह ब्रह्माण्ड और तीनो लोक में “हरि ॐ तत्सत् जय गुरुदत्त” महामंत्र से विशेष और कुछ नहीं ।

-इस महामंन्त्र का जाप उच्चकक्षा केक देव और मनुष्यो के अतिरिक्त कोई कर नहीं शकता ।

-विश्व में किसी भी जगह कोई भी वर्ण , सम्प्रदाय , जाती का व्यक्ती सद्गुरु प्रदत यह महामंत्र अगर श्रद्धा और विश्वास के साथ बोलता या सुनता हे तो उसको ध्यान में अपने इष्ट देव -गुरुदेव की और से विस्तृत प्रमाण मिलता ही हे।

-यह बिनसाम्प्रदायिक - सर्वसम्प्रदायिक महामंत्र का जाप हर कोई कर शकता हे। साधक को अपने धर्म और संप्रदाय के अनुरूप ही प्रगति और अनुभूति होती हे। साकार और निराकार साधको के लिए यह अद्भुत सीडी हे।

-यह महामंत्र वेदो का सार हे। अखिल सृष्टि का प्राण हे। परमात्मा का मूर्त और अमूर्त स्वरूप हे। यह महामंत्र में ब्रह्मा की अखिल सृष्टि समाई हुई हे। जिस तरह हवा की अंदर अणु परमाणु तत्व रहते हे उसी तरह इस महामंत्र के अंदर सबल अनु-परमाणु भरे हुए हे।

-पचीस तिस साल की सिद्धि के बाद जो मिलता हे वह इस महामंत्र के धून - ध्यान से सिर्फ एक घण्टे में मिल जाता हे। महामंत्र का जाप कीजिए और अनुभव कीजिए।

-इस महामंत्र के जाप से ऐकसाथ असंख्य लोगो को ध्यान लग सकता हे। आकाशवाणी या दूरदर्शन के माध्यम से अगर यह धुन प्रसारित की जाए , और कोई जिज्ञासु साधक श्रद्धा से अपनी आंख बंध कर धुन को सुने तो सद्गुरु कृपा से उसको शक्तिपात से सहजध्यान की अनुभूति होगी फिर क्यूँ न वह भारत की एक अबज जनता ही क्यूं ना हो। इसी महामंत्र की धुन से ध्यान छूटता भी हे।

-सद्गुरु के दिए हुए इस महामंत्र के सामने कोई तर्क बुद्धि चलती नहीं हे। उसे स्वीकारना ही पड़ता हे।

-यह महामंत्र समर्थ सिद्ध महापुरुष की वाणी हे। जो भी यह महामंत्र करता हे उसके साथ सद्गुरु दत्तात्रेय महाराज की सुक्ष्म उपस्थिति रहती ही हे, और साथ में सद्गुरु के आदेश अनुसार अनेक सिद्ध संतो भी मार्गदर्शन के लिए सतत हाजर रहते हे। किसी भी तरीके का भय नहीं रहता और रखना भी नहीं चाहिए।

-इस महामंत्र से अति कठिन गुरु गम्य मार्ग सरल हुआ हे। इस महामंत्र में गुरु तत्व बहोत ही गूढ़ रूप से हे।

-इस महामंत्र के जाप से अशांत मनुष्य को शान्ति ,बल , बुद्धि , धन और स्वस्थ्य मिलता हे। शुभ इच्छाऐ पूर्ण होती हे। यानिकि इस महामंत्र से क्या मिलता हे नहीं , लेकिन क्या नहीं मिलता है पूछिए , सबकुछ मिलता हे।

-किसी भी प्रकार की लौकिक और परलौकिक इच्छाए इस महामंत्र के जाप से पूर्ण होती हे। त्रिविधताप का शमन करनेवाले इस महामंत्र इ जाप से असाध्य ऐसी ब्रह्मबाधा - कुटुंबकलेश - धनहानि सब नष्ट होते हे। जरुरत हे अडिग श्रद्धा और पूर्ण समर्पणभाव की।

-किसी भी कक्षा का खराब व्यक्ति क्यूँ ना हो , इस महामंत्र के जाप से वह सुधर जाता हे। जिससे व्यसन न छूटता हो , या अयोग्य रास्ते पर चलते रहने वाले भी इस महामंत्र के जाप से सुधर जाते हे और उनका कल्याण होता हे।

-इस महामंत्र के थोड़े मिनट के जप के बाद वेदाभ्यास-विद्याभ्यास किया जाए तो अभ्यास में बहोत प्रगति होती हे। इस महामंत्र के जाप से यादशक्ति बढ़ती हे।

-इस महामंत्र के जाप से नास्तिक भी आस्तिक बन जाता हे। अनुभूति होने के कारण अपने इष्ट - गुरुदेव पे श्रद्धा दृढ होती हे।

-इस महामंत्र के जाप से धर्म, अर्थ , काम और मोक्ष चतुष्टय पुरुषार्थ की प्राप्ति होती हे। त्रिविध ताप से मुक्ति मिलती हे।

-यह आपातकालीन मंत्र हे। संतो के आशीर्वाद के कारण इस महामंत्र से अवश्य एक नूतन युग का निर्माण होगा।

-यह महामंत्र सब शास्त्रो का सारांश हे। शिष्य को अध्यात्म मार्ग में ले जाने वाले परब्रह्म परमात्मा का स्वरुप हे यह मंत्र। ईश्वर के पास पहोचने के लिए विमान की गति का वाहन हे यह महामंत्र जो प. पू . पुनीत बापुश्री हमारे लिए इस धरती पर लाये हे।

-यह सिद्ध मंत्र होने के कारण मंत्रशुद्धि के लिए दश संस्कार , न्यास इत्यादि कोई विधी नहीं करनी पड़ती। इस महामंत्र के जाप से अन्य मंत्र की शक्ति भी खिल जाती हे।

-सिद्ध लोक अनादिकाल से यह गुप्त महामंत्र का जाप कर रहे हे और सृष्टि के कल्याण के लिए कोई महापुरुष को प्रगट करते हे तब , सभी सिद्ध महापुरुष “हरि ॐ तत्सत् जय गुरुदत्त” का जाप करते हे और मंत्र की शक्ति से दिव्य सूक्ष्म परमाणु से उस महापुरुष को शक्ति प्रदान करते हे और वातावरण में एक अद्भुत चेतना का प्रवाह शुरू कर विश्वकल्याण में सहायक बनते हे।

-सद्गुरु की कृपा बिना कोई यह संसार पार नहीं करवा शकता। यह महामंत्र सद्गुरु का कृपा प्रसाद ही हे। इस महामंत्र में सद्गुरु दत्तात्रेय भगवन की अपार शांति भरी हुई हे। जो जितना प्रयत्न करेगा उसको उतना मिलेगा ही।

-महामंत्र हरि ॐ तत्सत् जय गुरुदत्त का भावार्थ : “हे सद्गुरु ! कृपा कर हमें इस अज्ञान से ज्ञान में ले जाइए, असत्य से सत्य में ले जाइए और मृत्यु से अमृत्यु में ले जाइए”

-महामंत्र द्रष्टा प. पू . पुनीताचारिजी महाराज के सत्संग में से

पूज्य पुनीत महाराज गुजरात के गिरनार क्षेत्र में अभी भी बिराजमान हे . उन्होंने ५० साल की कठिन तपस्या के बाद दत्तात्रेय भगवन से “हरी ॐ तत्सत् जय गुरु दत्त” यह मंत्र वरदान के रूप में प्राप्त किया हे .

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